precision and accuracy Dominance: 3 Vital Secrets Revealed

precision and accuracy Dominance: 3 Vital Secrets Revealed.यह ब्लॉग बीएससी फर्स्ट इयर के मेजर सेकंड पेपर/माइनर/ओपन इलेक्टिव विषय से लिया गया हैं।जो कि यूनिट II का एक इम्पोर्टेन्ट प्रश्न हैं|

precision and accuracy Dominance: 3 Vital Secrets Revealed

मापन में अनिश्चितता (यथार्थता तथा परिशुद्धता) को परिभाषित कीजिए।

मापन में अनिश्चितता-किसी मापन से प्राप्त परिणाम कितना सही है, इसमें हमेशा थोड़ी अनिश्चितता अवश्य ही रहती है। यह पाया गया है कि समान अवस्थाओं में किये गये दो प्रयोगों के परिणामों में भी थोड़ा अन्तर हो सकता है। मापी गई राशि के मान में यह सूक्ष्म अन्तर त्रुटि (Error) या अनिश्चितता (Uncertainty) कहलाता है।

त्रुटियाँ (Errors) निम्नलिखित दो प्रकार की होती हैं-

1. परिमित/निर्धारी (Determinate) एवं

2. अनियमित/संयोगिक (Random)।

1. परिमित/निर्धारी त्रुटियाँ (Determinate errors)

(i) यान्त्रिक त्रुटियाँ (Instrumental errors) –

ये त्रुटियाँ प्रयोग में लाये गये यन्त्र (Instrument) में विद्यमान त्रुटियों के कारण होती हैं।

(ii) व्यक्तिगत त्रुटियाँ (Personal errors) –

अलग-अलग व्यक्तियों द्वारा लिए गये प्रेक्षणों (Obser vations) में थोड़ा अन्तर अवश्य रहता है। उदाहरणार्थ, अनुमापन की क्रिया में कोई व्यक्ति रंग-परिवर्तन को बहुत गहरा रंग हो जाने पर ही पहचान पाता है।

(iii) कार्य-विधि सम्बन्धी त्रुटियाँ (Methodic errors) –

इस प्रकार की त्रुटियाँ उस समय उत्पन्न होती हैं जब किसी प्रयोग की सही विधि का पालन न किया जाये।

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2. अनियमित/संयोगिक त्रुटियाँ (Random errors) –

ये वे त्रुटियाँ हैं जो प्रयोग करने वाले व्यक्ति के नियन्त्रण में नहीं रहतीं। इन त्रुटियों का धनात्मक अथवा ऋणात्मक चिह्न होता है। धनात्मक चिह्न यह दर्शाता है कि मापी गई राशि का प्रेक्षित मान वास्तविक मान (True value) से थोड़ा अधिक है।

ऋणात्मक चिह्न यह बताता है कि प्रेक्षित मान वास्तविक मान से थोड़ा कम है। अनियमित/संयोगिक त्रुटियाँ प्रयोग के समय ताप, दाब, वोल्टेज परिवर्तन के कारण सम्भाव्य हैं।

(B) यथार्थता (Accuracy) —

यथार्थता (Accuracy) यह बताती है कि प्रेक्षित मान (Observed value) वास्तविक मान के कितना समीप है।

(C) परिशुद्धता (Precision) –

परिशुद्धता (Precision) से यह ज्ञात होता है कि उसी भौतिक राशि के लिये अलग-अलग प्रेक्षित मान आपस में एक-दूसरे के कितने निकट हैं।
इसे निम्न उदाहरण से भली-भाँति समझा जा सकता है। माना किसी वस्तु में धातु की वास्तविक या प्रामाणिक मात्रा 10-00 ग्राम है। दो लोगों द्वारा अलग-अलग विश्लेषण करने पर परिणाम निम्नानुसार प्राप्त होता
है-

precision and accuracy Dominance: 3 Vital Secrets Revealed

अतः पहले विश्लेषण द्वारा लिया मान 9.85 ज्यादा यथार्थ (Accurate) है क्योंकि यह वास्तविक मान के एक-दूसरे के निकट हैं। ज्यादा निकट है। लेकिन दूसरे विश्लेषक द्वारा प्रेक्षित मानों के परिशुद्धता (Precision) है क्योंकि तीनों मान परिशुद्धता की गणना करना एवं विश्वसनीयतः (Calculation of Precision and Reliability) किसी सामान्य विधि में किसी खास नाप का अंकगणितीय औसत मान से पहले विचलन की गणना की जाती है।

precision and accuracy Dominance: 3 Vital Secrets Revealed

विचलन का उपयोग भौतिक रसायन में ऐच्छिक राशि की परिशुद्धता की गणना के लिए किया जाता है।
औसत विचलन (Average Deviation) – औसत विचलन (A.D.) का तात्पर्य है, व्यष्टि आँकड़ों का अंकगणितीय औसत (A.M.) से प्राप्त विचलन मानों के योग को ” से भाग देने से प्राप्त होता है, जहाँ n, प्रयोग करने की संख्या को प्रदर्शित करता है। अर्थात्
A.D. (औसत विचलन) = = 2|6|
==£|x – A|
n
जहाँ 8;=xi-A.M., यहाँ x प्रायोगिक मानों में से कोई खास आँकड़ा है।

Accuracy-Precision (यथार्थता-परिशुद्धता) 2023


मानक विचलन (Standard Deviation) – मानक विचलन का मतलब है, व्यष्टि विचलनों के वर्गों के योग को (n-1) के वर्गमूलकों से भाग दिया जाता है।
अर्थात्
0 =
62 n-1
मानक विचलन (०), औसत विचलन (A.D.) का 1.25 गुना होता है, इसका तात्पर्य यह है कि प्राप्त परिणामों की A.M. ° A.D. के परास के बजाय A. M. ± 5 के परास के बीच रहने की सम्भावना अधिक होती है।
मानक विचलन के वर्ग को प्रसरण (Variation) कहते हैं। परिशुद्धता और भी बेहतर प्रदर्शन प्रसरण गुणांक (Coefficient of variant) [C.V.] द्वारा किया जाता है जहाँ कि,
eV =
σx100 A.M.

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