uv spectroscopy principle Unveiled: A Comprehensive Guide 23

uv spectroscopy principle Unveiled: A Comprehensive Guide 23 . इस blog में पराबेंगनी स्पेक्ट्रोस्कोपी के उपयोग जैसे कि विटामिन A की संरचना, संयुग्मन,अणु की संरचना कार्बोनिल ग्रुप में अंतर करना एवं क्रियात्मक समूह आदि ज्ञात करने में उपयोग होता हैं।इसके बारे में विस्तार से देखेंगे।

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1 uv spectroscopy principle Unveiled: A Comprehensive Guide 23
1.1 पराबेंगनी स्पेक्ट्रोस्कोपी के मुख्य उपयोग निम्नलिखित हैं-

uv spectroscopy principle Unveiled: A Comprehensive Guide 23

पराबेंगनी स्पेक्ट्रोस्कोपी के मुख्य उपयोग निम्नलिखित हैं-

  • कंपाउंड में क्रियात्मक समूह ज्ञात करना
  • कार्बोनिल कंपाउंड में विभेद करना
  • कार्बोनिल कंपाउंड में मक्सिमा वैल्यू की पुष्टि करना
  • गतिकी का अध्ययन
  • विटामिन A की संरचना ज्ञात करना
  • अणु की संरचना ज्ञात करना
  • हैलाईड संकुलों का अध्ययन
  • समा वयवता का अध्ययन
  • विन्यास निर्धारण
  • कंपाउंड में संयुग्मन की सीमा ज्ञात करना
  • अशुद्धि ज्ञात करना
  • अणुभार ज्ञात करना
  • डिफरेंट साल्वेंट में कंपाउंड की पहचान करना
  • आवेश स्थानान्तरण संकुलों का अध्ययन

कंपाउंड में क्रियात्मक समूह ज्ञात करन(To Detect Functional Group in a Compound):-

पराबेंगनी तकनीकी का यूज़ कंपाउंड में वर्ण उत्पादक(क्रोमोफोर) की उपस्थिति या अनुपस्थिति ज्ञात करने में किया जाता हैं।कंपाउंड के स्पेक्ट्रम में एक विशेष वेवलेंथ की अनुपस्थिति उससे सम्बंधित ग्रुप की पुष्टि करती हैं।

यदि 200 nm से अधिक वेबलेंथ पर अल्ट्रावायलेट स्पेक्ट्रम पारदर्शक हैं मतलब प्राप्त नहीं होता हैं तो कंपाउंड में संयुग्मन,कार्बोनिल ग्रुप (एल्डिहाइड व कीटोन),बेंजीन या एरोमेटिक यौगिक तथा ब्रोमो या आयोड़ो एटम उपस्थित नहीं होते हैं।आइसोलेटेड डबल बांड या अन्य ग्रुप उपस्थित हो सकते हैं।

कार्बोनिल कंपाउंड में विभेद करना(To Distinct Carbonyl Compounds):-

संयुग्मी कार्बोनिल कंपाउंड्स में मैक्सिमा अधिक लम्बी वेबलेंथ पर प्राप्त होता हैं।

uv spectroscopy principle
uv spectroscopy principle

कार्बोनिल यौगिकों में कांजुगेसन के प्रवेश कराने पर अर्थात जब >C=O ग्रुप >C=C डबल बांड के संयुग्मन में होता हैं तब n–>π* और π–>π* संक्रमण अपेक्षाकृत अधिक लम्बी वेबलेंथ मतलब कम उर्जा पर होते हैं क्योंकि उतेजित और ग्राउंड अवस्थाओं की उर्जाओं में अंतर कम हो जाता हैं।जैसे

uv spectroscopy principle
uv spectroscopy principle

इसी प्रकार बेन्जो फेनोंन UV क्षेत्र में दो अवशोषण मैक्सिमा क्रमश:345 nm(n–>π* )तथा 245 nm(π–>π*) show करता हैं।

संयुग्मित कार्बोनिल कंपाउंड्स (alfa,beta-unsaturated Carbonyl Compounda or enones) के अवशोषण मैक्सिमा की भविष्यवाणी करने के लिए वुडवर्ड ने ब्यूटी नोन (मिथाइल विनाइल कीटोन ) को जनक कंपाउंड माना तथा प्रत्येक प्रतिस्थापि के लिए उसकी स्थिति के अनुसार कुछ निश्चित मान दिए जिन्हें ब्यूटी नोन के मान में जोड दिया जाता हैं। इन मानो को सारणी में show क्या गया हैं ।

जनक पद्धति को C=C-CR=O द्वारा भी show किया जा सकता हैं ।R एक H ,एल्कील ग्रुप या 5 या 6 मेम्बर वलय हैं।

uv spectroscopy principle
uv spectroscopy principle

कार्बोनिल कंपाउंड में मक्सिमा वैल्यू की पुष्टि करना(To Confirm Maxima Value In Carbonyl Compounds):-

वुड वर्ड व फा इज़र रूल से कार्बोनिल यौगिक का मैक्सिमा कैलकुलेट किया जा सकता हैं।इसकी पुष्टि अल्ट्रावायलेट स्पेक्ट्रम से की जाती हैं।

उदाहरण:-

गणना -यौगिक I के लिए आधार मान 215 nm हैं।इसमें अल्फ़ा कार्बन पर एल्कील ग्रुप के लिए 10 nm और बीटा-कार्बन पर दूसरे एल्कील ग्रुप के लिए 12 nm जोड़ेंगे। इस प्रकार कुल मान 215+10+12=237 nm होगा।

इसी प्रकार यौगिक II के लिए

मूल मान=215nm

1बीटा एल्कील ग्रुप =+12 nm

1 बीटा एल्कील ग्रुप= +12

…………………………………………

योग = 239nm

प्रेक्षित मान =239 nm

कंपाउंड III के लिए आधार मान 215 nm हैं।एक एल्कील ग्रुप के लिए 10 nm तथा दो बीटा एल्कील समूहों के 2*12 तथा दोनों वलयो के सापेक्ष एक्सो साईक्लिकद्विबंध के लिए 10 nm जोड़ेंगे।इस प्रकार कुल मान 215+10+24+10 =259 nm होगा जो कि प्रैक्टिकल मान(262 nm ) के लगभग बराबर हैं।

गतिकी का अध्ययन(Study of Kinetics ):-

किसी रिएक्शन की गतिकी का अध्यन प्रोडक्ट की समय के साथ सांद्रता चेंज को मापकर किया जाता हैं।किसी कंपाउंड का अवशोषण उसकी सांद्रता के समानुपाती होता हैं।अत:अल्ट्रावायलेट स्पेक्ट्र्मिकी का उपयोग रिएक्शन अध्ययन के लिए किया जाता हैं।

विभिन्न अंतरालों पर क्रियाकारी मिश्रण में प्रोडक्ट का अवशोषण ज्ञात कर मानक ग्राफ से सांद्रता ज्ञात कर ली जाती हैं।

विटामिन A की संरचना ज्ञात करना:-

विटामिन A1,325 nm पर अवशोषित करता है जबकि विटामिन A2 के उच्चिष्ठ (मैक्सिमा) अवशोषण 287 व 351 nm पर प्राप्त होते हैं। इसका कारण विटामिन A2 में एक अतिरिक्त संयुग्मी द्विबंध हैं।

Application of Ultraviolet Spectroscopy
Application of Ultraviolet Spectroscopy
Application of Ultraviolet Spectroscopy
Application of Ultraviolet Spectroscopy

अणु की संरचना ज्ञात करना(Structure Determination Of a Molecule):-

सैधान्तिक रूप से किसी मॉलिक्यूल का स्पेक्ट्रम शो करना संभव नहीं होता हैं।किसी अननोन मॉलिक्यूल का अल्ट्रावायलेट स्पेक्ट्रम से यदि समानता शो करता हैं तो अज्ञात मॉलिक्यूल की संरचना को explain करना पॉसिबल हो जाता हैं।

हार्ट ले रूल के अनुसार same (समान) स्ट्रक्चर रखने वाले यौगिक समान अवशोषण स्पेक्ट्रा रखते हैं।उदाहरण के लिए क़ुइनोलिन,सायनोजन ब्रोमाइड व हाइड्रोजन साइनाइड से एक्शन करके आगे दिए अनुसार दो डाई साइनाइड बनाता हैं।

अणु की संरचना ज्ञात करना(Structure Determination Of a Molecule):-
अणु की संरचना ज्ञात करना(Structure Determination Of a Molecule):-

कंपाउंड (A) का अल्ट्रावायलेट स्पेक्ट्रम,फिनाइल सायनामाइड(C) तथा N-मिथाइल फिनाइल सायनामाइड (D) के पराबेंगनी स्पेक्ट्रा से समानता रखता हैं।

अणु की संरचना ज्ञात करना
अणु की संरचना ज्ञात करना

अत: यह रिजल्ट(निष्कर्ष) निकाला जा सकता हैं कि कंपाउंड (A) में α, β असंत्रप्त(Unsaturated) नाइट्राइल ग्रुप प्रेजेंट हैं।

Structure Determination Of a Molecule
Structure Determination Of a Molecule

कंपाउंड (B) का पराबेंगनी स्पेक्ट्रम,N-मिथाइल स्टायरल सायनामाइड(E) के अल्ट्रावायलेट स्पेक्ट्रम से समानता शो हैं। अत: कंपाउंड(B) α, β असंत्रप्त(Unsaturated) नाइट्राइल ग्रुप नहीं रखता हैं।

हैलाईड संकुलों का अध्ययन(Study of Halide Complexes):-

टेलुरियम को [TeI6]2-के रूप में 355 nm पर मापकर ज्ञात करते हैं।

समा वयवता का अध्ययन

विन्यास निर्धारण(Determination Of Configuration):-

पराबेंगनी स्पेक्ट्रोस्कोपी विन्यास सम्बन्ध निर्धारण में महत्वपूर्ण भूमिका रखती हैं। उदाहरण के लिए,द्विबंधों का असमतलीय विन्यास मैक्सिमा को निम्न तरंगदेर्य की ओर विस्थापित कर तीव्रता कम करता है।2,3-डा ई तृतीयक ब्यूटील-1,3 -ब्यूटा डाई ईन 180 nm पर मैक्सिमा दर्शाता हैं।जबकि डाइ एल्कील-1,3 ब्यूटा डाई ईन 227 nm पर।

कंपाउंड में संयुग्मन की सीमा ज्ञात करना

अशुद्धि ज्ञात करना(detection of Impurities):-

आर्गेनिक कंपाउंड में अशुद्धियों को ज्ञात करने के लिए अल्ट्रावायलेट स्पेक्ट्रोस्कोपी बेस्ट विधि हैं.अत्यधिक तनु सांद्रता पर भी अल्ट्रावायलेट स्पेक्ट्रोस्कोपी में अशुद्धियों द्वारा अति तीक्ष्ण बैंड प्राप्त होता हैं।उदाहरण के लिए बेंजीन में साईक्लो हेक्सेनव एथेनॉल में बेंजीन की असुद्धि उनके क्रमश:255nm व 260nm पर अवशोषण से आसानी से ज्ञात हो जाती हैं।

अणुभार ज्ञात करना

डिफरेंट साल्वेंट में कंपाउंड की पहचान करना

आवेश स्थानान्तरण संकुलों का अध्ययन(Study of Charge Transfer Complexes):-

आवेश स्थानांतरण पर एक नविन बैंड का सृजन होता हैं।उदाहरण के लिए,बेंजीन-आयोडीन काम्प्लेक्स में बेंजीन का 255 nm पर व आयोडीन का हेक्सेन में 500 nm पर मक्सिमा (उच्चीष्ठ ) पाया जाता हैं।इस आवेश स्थानांतरण काम्प्लेक्स का एक तीव्र अतिरिक्त बैंड 300nm पर पाया जाता हैं।

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