why electronic configuration of copper and chromium is irregular

Electron Configuration Is The Distribution of Electrons In Different-इलेक्ट्रॉन विन्यास विभिन्न में इलेक्ट्रॉनों का वितरण है

Electron Configuration Is The Distribution of Electrons In Different-इलेक्ट्रॉन विन्यास विभिन्न में इलेक्ट्रॉनों का वितरण है।किसी परमाणु के विभिन्न कोशों,subshell कक्षकों में उसके इलेक्ट्रानों का distribution उसका electronic configuration कहलाता हैं।यदि किसी तत्व की परमाणु संख्या ज्ञात हो तो इन नियमों (ऑफ बाऊ नियम,पाउली अपवर्जन  सिधांत एवं hund का बहुकता का नियम आदि)के आधार पर उसका सम्पूर्ण electronic configuration लिखा जा सकता हैं।

Electron Configuration Is The Distribution of Electrons In Different-इलेक्ट्रॉन विन्यास विभिन्न में इलेक्ट्रॉनों का वितरण है।

electronic configuration लिखते समय उपर्युक्त नियमों के अतरिक्त यह भी ध्यान में रखते हैं कि –

(1) किसी भी कक्षा में इलेक्ट्रानों की संख्या 2n2 हो सकती हैं जबकि n उस कक्षा की क्रम संख्या या principal quantum number हैं।

(2) किसी भी subshell में (s,p,d और f )में इलेक्ट्रानों की अधिकतम संख्या 2(2l + 1) बराबर होती हैं जबकि l azimuthal quantum number हैं।s,p,d, व f subshell के लिए L  का मान क्रमश:l = 0,1,2,3 होता हैं ।अत:s,p,d व f subshell में अधिकतम 2,6,10,14 electron हो सकते हैं।

electron configuration is based on science

(3) कक्षको में इलेक्ट्रानों के भरने के सामान्य नियम यह हैं कि-

(i) नया electron उस कक्षक में प्रवेश  करता हैं जिसके लिए (n+l) का मान  न्यूनतम होता हैं ।यदि दो कक्षकों  के लिए उनके (n+l)के मान बराबर हैं तो electron उस कक्षक में पहले प्रवेश करेगा जिसके लिए n का मान कम होता हैं l

(ii) किसी उपकोश के कक्षकों में इलेक्ट्रान युग्म तब तक नहीं बनते जब तक कि उस उपकोश के प्रतेक्य कक्षक में (hund’s rule) समदिश स्पिन वाला एक-एक इलेक्ट्रान प्रवेश नहीं कर जाता हैं।

(iii) किसी भी उपकोश के(pauli exclusion principle) प्रतेक्य कक्षक के दोनों electrons के स्पिन विपरीत दिशा में होते हैं।

how to make electronic configuration of elements

(4) अधिकांश तत्वों के कक्षकों में इलेक्ट्रानों की फिलिंग (n + l) नियम के अनुसार होता हैं,किन्तु उच्च उर्जा स्तरों में इलेक्ट्रानों की फिलिंग उपकोशों के आपेक्षिक स्थायित्व  के द्वारा निर्धारित होता हैं ।

आंशिक रूप से भरें हुए उपकोश की तुलना में वह उपकोश अधिक स्थायी होता हैं,जिसके समस्त कक्षक अर्ध या पूर्ण भरें हुए होते हैं।

अत: इलेक्ट्रान इस प्रकार भरें जाते हैं कि उपकोश स्थायित्व प्राप्त करें ।इसे आगे के उदाहरणों के द्वारा स्पस्ट किया गया हैं।

(5) कक्षकों के रूप में electronic configuration लिखते समय कक्षकों को एक बॉक्स या वृत्त  के द्वारा प्रदर्शित करते हैं तथा इसमें उपस्थित electron को उसके स्पिन के दिशा के सहित एक तीर के द्वारा show करते हैं ।

जैसे

Electron Configuration Is The Distribution of Electrons In Different-इलेक्ट्रॉन विन्यास विभिन्न में इलेक्ट्रॉनों का वितरण है
Electron Configuration Is The Distribution of Electrons In Different-इलेक्ट्रॉन विन्यास विभिन्न में इलेक्ट्रॉनों का वितरण है

Electron Configuration Is The Distribution of Electrons In Different-इलेक्ट्रॉन विन्यास विभिन्न में इलेक्ट्रॉनों का वितरण है।

किसी orbital का electronic configuration निम्न नोटेशन के द्वारा भी प्रदर्शित किया जा सकता हैं:

nlx

जहाँ n= मुख्य कोश संख्या, l= उपकोश या कक्षक का प्रतीक, x = उस कक्षक में विधमान electron

जैसे-3p4 का तात्पर्य तीसरे मुख्य कोश के p-उपकोश में चार इलेक्ट्रानों से होता हैं।इस प्रकार इन नोटेशन की सहायता से परमाणु का सम्पूर्ण विन्यास लिखा जा सकता हैं ।कक्षकों की उर्जा वृद्दि के क्रम में कक्षकों के संकेतन एक के बाद एक लिखे जाते हैं।

जैसे carbon (6) का electronic configuration निम्न प्रकार प्रदर्शित किया जा सकता हैं :

Electron Configuration Is The Distribution of Electrons In Different
Electron Configuration Is The Distribution of Electrons In Different

विन्यास को सरल बनाने के लिए कभी-कभी कक्षकों की संख्या नहीं लिखते हैं,जैसे

C =1S2,2S2,2P2

इसके अतिरिक्त कुछ बड़े परमाणुओं के विन्यास प्रदर्शित करने के लिए पहले भाग में आये विन्यास को नोबल gas का प्रतीक कोष्ठक में लिखकर शेष इलेक्ट्रानों का विन्यास लिखा जाता हैं,जैसे

Se21 = [Ar] 3d2,4S2

Zn30= [Ar] 3d10,4S2

उपर्युक्त नियमों तथा उर्जा स्तर के क्रम को ध्यान में रखते हुए कुछ तत्वों का electronic configuration यहाँ प्रदर्शित किया जा रहा हैं-

electron configuration hydrogen

हाइड्रोजन (परमाणु क्रमांक =1)-चूँकि हाइड्रोजन में केवल एक इलेक्ट्रान होता हैं,इसे 1s orbital में प्रवेश करना चाहिए अत: हाइड्रोजन का electronic विन्यास निम्नलिखित होता हैं:

1H     :  1S1    या 

इलेक्ट्रॉन विन्यास विभिन्न में इलेक्ट्रॉनों का वितरण है।
इलेक्ट्रॉन विन्यास विभिन्न में इलेक्ट्रॉनों का वितरण है।

electron configuration helium

हीलियम (परमाणु क्रमांक =2)-हीलियम में दो इलेक्ट्रान होते हैं ।ये दोनों 1s में प्रवेश करते हैं।यह दोनों इलेक्ट्रान स्पिन विपरीत दिशा में होते हैं ।

2H     :       1s2

इलेक्ट्रॉन विन्यास विभिन्न में इलेक्ट्रॉनों का वितरण है।
इलेक्ट्रॉन विन्यास विभिन्न में इलेक्ट्रॉनों का वितरण है।

electronic configuration of lithium

लिथियम (परमाणु क्रमांक= 3)-चूँकि किसी orbital में दो से अधिक इलेक्ट्रान नहीं आ सकते हैं इसलिए इसका तीसरा इलेक्ट्रान अगली उर्जा वाली ऑर्बिटल, 2s में प्रवेश करता हैं।

3Li     :   1S2,2S1

इलेक्ट्रॉन विन्यास विभिन्न में इलेक्ट्रॉनों का वितरण है।
इलेक्ट्रॉन विन्यास विभिन्न में इलेक्ट्रॉनों का वितरण है।

electronic configuration with atomic number

electron configuration beryllium

बेरीलियम(परमाणु क्रमांक=4)-बेरीलियम में चौथा इलेक्ट्रान 2s  में भरता हैं ।

4Be    :   1S2,2S2

इलेक्ट्रॉन विन्यास विभिन्न में इलेक्ट्रॉनों का वितरण है।
इलेक्ट्रॉन विन्यास विभिन्न में इलेक्ट्रॉनों का वितरण है।

electron configuration boron

बोरान (परमाणु क्रमांक=5)- बेरीलियम (परमाणु क्रमांक=4) तक 1s और 2s ऑर्बिटल पूर्ण रूप से भर जाते हैं।बोरान में पांचवां इलेक्ट्रान 2p के किसी एक ऑर्बिटल में जाता हैं।

5B     :     1s2 2s2 2px1

Electron Configuration Is The Distribution of Electrons In Different
Electron Configuration Is The Distribution of Electrons In Different

electron configuration carbon

कार्बन(परमाणु क्रमांक=6) -carbon में छठा इलेक्ट्रान 2p उपकोश में जाता हैं किन्तु यह 2px में न जाकर(अर्थात 2px में युग्मित न होकर) 2p उपकोश के अन्य ऑर्बिटल में जाता हैं,क्योंकि hund के नियम के अनुसार किसी भी उपकोश के किसी भी orbital  में इलेक्ट्रान युग्म तब तक नहीं बनते हैं जब तक कि उस उपकोश के समस्त orbitals में एक-एक इलेक्ट्रान प्रवेश नहीं कर जाता हैं ।

6C     :   1s2,2s2,2px1 2py1

electron configuration carbon
electron configuration carbon

electron configuration nitrogen

नाइट्रोजन (परमाणु क्रमांक=7)-इसमें सातवाँ इलेक्ट्रान 2p के नए p-ऑर्बिटल(pz) में प्रवेश करता हैं और इसमें तीन अयुग्मित इलेक्ट्रान हो जाते हैं।

7N      :    1s2,2s2,2px1 2py1 2pz1  

electron configuration nitrogen
electron configuration nitrogen

electronic configuration of oxygen

ऑक्सीजन(परमाणु क्रमांक=8)-नाइट्रोजन परमाणु के p-orbitals में एक-एक इलेक्ट्रान भर जाने के बाद ऑक्सीजन में आँठवा इलेक्ट्रान जोड़ा बनता हैं।

8O     :  1s2,2s2,2px2py1 2pz1  

electronic configuration of oxygen
electronic configuration of oxygen

electronic configuration with example

electron configuration for fluorine

फ्लोरीन(परमाणु क्रमांक=9) व नीआन (परमाणु क्रमांक= 10) में p-orbitals में क्रमश: एक और 2 इलेक्ट्रान प्रवेश करते हैं और p-orbital पूर्ण रूप से भर जाते हैं अर्थात तीनों p-orbitals में इलेक्ट्रान युग्म बन जाते हैं।

9F   : 1s2,2s2,2px2py2 2pz1  

10Ne :  1s2,2s2,2px2py2 2pz2  

Ne(10) के बाद आगे के तत्वों सोडियम (प.क्र.=11) से  आर्गन (प.क्र.=18) तक इलेक्ट्रानों का भराव 3s व 3p में होता हैं। 3p के बाद K (प.क्र.=19) में उन्नीसवे इलेक्ट्रान का प्रवेश 3d में न होकर 4s में होता हैं क्योंकि 4s कक्षक की उर्जा 3d कक्षक की उर्जा से कम होती हैं।4s कक्षक Ca (20) में पूर्ण हो जाता हैं।इसके बाद प.क्र 21 से 30 तक इलेक्ट्रान 3d में भरते हैं।

Electron Configuration Is The Distribution of Electrons In Different
Electron Configuration Is The Distribution of Electrons In Different
Electron Configuration Is The Distribution of Electrons In Different
Electron Configuration Is The Distribution of Electrons In Different

कैल्सियम (20) के बाद आने वाले अगले दस तत्व(प.क्र.=21-30)

स्कैंडियम (Sc)21

टाइटेनियम (Ti )22

वेनेडियम (V) 23

क्रोमियम (Cr) 24

मैगनीज (Mn) 25

आयरन (Fe) 26

कोबाल्ट (Co) 27

निकल (Ni)28

कॉपर (Cu) 29

जिंक (Zn) 30 हैं ।

इन तत्वों में आतंरिक 3d orbitals में इलेक्ट्रान  भरते हैं जबकि आउटर कक्षक (4s2) पहले से ही भरा रहता हैं। इन सभी तत्वों को संक्रमण तत्व (प्रथम संक्रमण श्रृंखला) कहते हैं।

Electron Configuration Is The Distribution of Electrons In Different
Electron Configuration Is The Distribution of Electrons In Different

electron configuration exceptions

Examples:

why electronic configuration of copper and chromium is irregular

कॉपर और क्रोमियम के अपवादिक विन्यास -उपर्युक्त विन्यासों से प्रकट होता हैं कि इलेक्ट्रानों के भराव के सामान्य  क्रम (आफ बाऊ सिधांत ) में दों असमानताएं पाई जाती हैं।कॉपर और क्रोमियम के विन्यास नियमानुसार अपेक्षित विन्यास से भिन्न होते हैं।आफ बाऊ नियम के अनुसार,इन तत्वों के electronic configuration निम्नलिखित होने चाहिए थे:

24Cr = 1s2,2s2,2p6,3s23p6,4s23d4

29Cu=1s2,2s2,2p6,3s23p6,4s23d9

किन्तु इनके वास्तविक विन्यास निम्नलिखित होते है :

24Cr =1s2,2s2,2p6,3s23p6,4s13d5

29Cu=1s2,2s2,2p6,3s23p6,4s13d10

उपर्युक्त विन्यास से प्रकट होता हैं कि कॉपर और क्रोमियम के 3d कक्षकों में क्रमश:4 और 9 के स्थान पर 5 और 10 इलेक्ट्रान होते हैं।इसका स्पस्टीकरण देने के लिए यह सुझाव दिया गया हैं कि उच्च उपकोशों में (यहाँ 4s व 3d ) दो क्रमागत उपकोशों के बीच उर्जा का अंतर बहुत कम होता हैं और कोई भी उपकोश तभी स्थाई होता हैं जब वह पूर्ण भर जाये या निर्धारित संख्या से आधे इलेक्ट्रानों से भर जाये।

अत: अपेक्षाकृत अधिक स्थायित्व प्राप्त करने के लिए Cr में पूर्ण पूरित 4s का एक इलेक्ट्रान 3d में चला जाता हैं जिससे 3d उपकोश half filled,3d5हो जाता हैं।इसी प्रकार Cu में 3d9 न होकर 3d10 पूर्ण पूरित हो जाता हैं।3d के पूर्ण हो जाने के बाद इलेक्ट्रान फिर 4s में प्रवेश करता हैं और निकाय स्थाई अवस्था ग्रहण कर लेता हैं ।

समान उर्जा के अर्धपुरित और पूर्ण पूरित समभ्रंश ऑर्बिटल सममित व्यवस्था तथा उर्जा विनिमय के कारण निकाय को अतिरिक्त स्थायित्व प्रदान करते हैं ।इस प्रकार परमाणु की p3,p6,d5,d10,f7,f14 में orbital अर्धपुरित या  पूर्ण पूरित होते हैं,अधिक स्थायी होती हैं ।

      

में

 

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *