Concept Of Chromophore-Auxochrome/क्रोमोफोर-आक्सोक्रोम अवधारणा

Concept Of Chromophore-Auxochrome/क्रोमोफोर-आक्सोक्रोम अवधारणा।यह ब्लॉग B.Sc. Second year(organic chemistry first unit ) का एक imp टॉपिक के अंतर्गत आता हैं।B.SC. final year में यह concept dyes वाले chapter में use होता हैं।मतलब यह हुआ कि यह टॉपिक final year के student के लिए भी imp हैं।

इस अवधारणा को समझने के लिए हमें EMR को समझाना होगा । EMR में जो 400-800nm का region होता हैं उसेvisible region कहते हैं। जिससे हमें कोई OBJECT COLURFUL दिखाई देता हैं।

जब यह radiation किसी objectपर डाली जाती हैं तो object में present electron radiation का absorption कर lower energy लेवल से higher energy level में चले जाते हैं।

चूँकि higher energy level में electron unstable होता हैं,इसलिए वह return lower energy level में आता हैं।जब वह higher से lower energy level में आता हैं तो जो energy उसने absorb की थी उसे निकालता हैं मतलब emit करता हैं।

 

Concept Of Chromophore-Auxochrome/क्रोमोफोर-आक्सोक्रोम अवधारणा

Chromophore

वे isolated functional group जो ultraviolet region में characteristic absorption show करते हैं,chromophore या वर्ण मूलक कहलाते हैं।या प्राय: covalent unsaturated(double या triple ness ) group होता हैं।ये कलर के लिए responsibleहोते हैं।

उदाहरण के लिए :-सभी unsaturated group

–C≡N,>C=C<,>C=O,>C=S,–N=N,–NO2 etc.

actually में वे functional group जिनमे n–>π* और π—->π* transition होता हैं,इन्हें chromophore कहते हैं। chromophore अणु दो प्रकार के होते हैं।

  1. एक प्रकार के chromophore में π-electron होते  हैं इनमे π—->π* transition होता हैं।example CH2=CH2,CH≡CH etc.
  2. दुसरे प्रकार के chromophore में π-और n-(non-bonding) electron दोनों होते हैं।इनमे दो प्रकार के transition हो सकते हैं।इनमे n–>π* एवं π—->π* transition possible होता हैं।example -NO2,-N=N-,>C=O etc.

कोई भी compound यदि colurfulहैं,कोई हरा दिख रहा हैं,कोई नीला,पीला,लाल या कुछ भी color दिख रहा हो तो ये 100%sure है की उसमे chromophore होगा।

लेकिन यह जरुरी नहीं कि सारे chromophore group  कलर देते हैं।मतलब यह हुआ की यह जरुरी नहीं की जो  chromophore  है वो सारे compound को colorप्रदान करें।

chromophore के लिए दो condition जरुरी  हैं:-दोनों में से कोई भी कम हुआ तो वो chromophore नहीं होगा।

1.chromophore present होना ही चाहिए।

2. 400 से 800 nm (visible region)की range होना जरुरी हैं।

Auxochrome

खुद का कोई color नहीं होता लेकिन chromophore के साथ जोड़ने पर  ये chromophore का color बढ़ा देते हैं।Auxochrome एक chromophore से जुड़े atoms का एक group है जो कि chromophore की light को absorbed करने की capacity को Revised करता है।

सभी n—->σ* transition वो auxochrome के अन्दर  आते है। सारे saturated होना चाहिए। इसमें non-bonding मतलब lone pair ऑफ़ electron होना चाहिए और sigma bond होना चाहिए।साथ हे साथ इनमे conjugation भी होना चाहिए। उदाहरण के लिए>-OH, -NH2,-Cl आदि

एक Auxochrome एक या एक से अधिक अकेले atoms के साथ atoms का एक Functional Group है,जो एक chromophore से जुड़ा होता है, दोनों wavelength और absorption की intensity को बढ़ा देते   है।

n-electron ness ऐसा group जो स्वयं chromophore की भांति behavior नहीं show करता हैं,लेकिन जब chromophore के साथ present होता हैं।तब यह उसके absorption band को लम्बी wavelength की ओर विस्थापित कर देता हैं।(रेड red shift), auxochrome कहलाता हैं।

यह absorption band की intensity  को भी बढाता हैं।जैसे->-OH, -NH2,-Cl आदि group।जब Auxochrome किसी chromophore के साथ जुड़ता हैं,तो lone pair का साझा करके conjugation को expand कर देता हैं।

इस विस्तारित conjugation के कारण यह एक नए chromophore में change हो जाता हैं,जो एक भिन्न maximum absorption तथा विलोपन गुणांक रखता हैं।

जैसे बेंजीन का absorption maximum 255nm (εmax =204)पर प्राप्त होता हैं जबकि aniline का maximum 280 nm (εmax 1500)पर प्राप्त होता हैं।

यहाँ amino group (-NH2) एक Auxochrome हैं।

 

 

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