विधुत चुम्बकीय विकिरण की द्रश्य विकिरण से इलेक्ट्रान का संक्रमण कैसे होता हैं

विधुत चुम्बकीय विकिरण की द्रश्य विकिरण से इलेक्ट्रान का संक्रमण कैसे होता हैं
Types of Electronic Transition/इलेक्ट्रॉनिक संक्रमण के प्रकार

विधुत चुम्बकीय विकिरण की द्रश्य विकिरण से इलेक्ट्रान का संक्रमण कैसे होता हैं।यह blog B.Sc. second year के organic chemistry की unit first का एक इम्पोर्टेन्ट टॉपिक हैं,जो एग्जाम में अक्सर पूछा जाता हैं।”जब आर्गेनिक compound ultra violet और visible region में light का absorption करते हैं तब इलेक्ट्रान लोअर electronic energy लेवल से हायर   electronic energy लेवल में चले जाते हैं।अर्थात संक्रमित हो जाते हैं।इस कारण ultra violet और visible spectrum को इलेक्ट्रॉनिक spectrum कहते हैं।

विधुत चुम्बकीय विकिरण की द्रश्य विकिरण से इलेक्ट्रान का संक्रमण कैसे होता हैं

Molecular Orbitals 

electronic spectrum ( ultraviolet spectrum) में band का उदगम valence electrons के transition अर्थात high energyके orbital में जाने से होता हैं।यह transition electrons द्वारा energy को absorbed करने के कारण होता हैं।

किसी पदार्थ के molecule में विभिन्न प्रकार के valence electron होते हैं इसलिए energy का absorption होने पर उसमे भिन्न-भिन्न प्रकार के transitionहोते हैं।इन transitions को समझने से पहले विभिन्न प्रकार के valence electrons को समझना आवश्यक हैं।

जब atoms के संयोग से molecule का निर्माण होता हैं तब इन atoms के orbitals का परस्पर संयोग होता हैं।दो atom orbitals के संयोग से दो molecular orbitals बनते हैं,इनमे से एक low energyवाला bonding orbital कहलाता हैं तथा दूसरा high energy वाला molecular orbital anti-bonding orbital कहलाता हैं।

Details of Molecular Orbitals 

overlap होने वाले orbitals के नेचर पर depend bond molecular σ-प्रकार का हो सकता हैं।जिसमे electron density intranuclear axis के साथ-साथ केन्द्रित रहता है या फिर π-प्रकार का हो सकता हैजिसमे electron का जो घनत्व होता हैं वो intranuclear axis के दोनों और focused रहता हैं।

low energy वाले bonding orbitals को क्रमश:σ(sigma ) तथा π (pi  ) orbital कहते हैं तथा इनके relevant high energy वाले anti- bonding orbital  को क्रमश:σ*(sigma star) तथा π*(pi star ) orbital कहते हैं।

molecule की ground state में electron bonding orbitals में पायें जाते हैं,anti-bonding orbitals में नहीं पाए जाते हैं।कुछ orbitals bond के बनाने में काम नहीं आते हैं,इन orbitals को n-orbital या non-bonding  orbital कहते हैं।

विधुत चुम्बकीय विकिरण की द्रश्य विकिरण से इलेक्ट्रान का संक्रमण कैसे होता हैं

जब electrons द्वारा energy का absorption होता हैं तो electron किसी एक filled orbital(σ,π या  ) से उतेजित होकर anti-bonding (σ*,π*) orbital में प्रवेश कर जाता हैं।चूँकि electrons में कई प्रकार के transition possible है। इसलिए इन transitions के relevantकई प्रकार के  absorption होते हैं।इस आधार पर electronic transition इस प्रकार से हैं:-

  • σ —>σ*transition
  • n —>σ*transition
  • n —>π*transition
  • π —>π*transition
  • σ —>π*transition

σ —>σ*transition:-

इस प्रकार के transition के लिए high energy की आवश्यकता होती हैं।अत:ऐसे compound जिनके valence shell के सभी electron single bond में प्रयुक्त होते हैं,ultra violet region में absorption नहीं कर पाते है।saturated hydrocarbon इसी प्रकार के compound हैं तथा ये ultra violet radiation में transparent रहते हैं।

n—>σ*transition:-

इस प्रकार के transition में पहले प्रकार के transition की तुलना में कम energy की need होती हैं।यह energy emr की ultra violet field से प्राप्त हो सकती हैं।वे saturated compound जिनमें non-bonding electron वाले odd atoms से युक्त group single bond द्वारा जुड़े रहते हैं।उदाहरण के लिए saturated halide, alcohol, ether, ketone, amine आदि 

Compound
λ(nm)
Intensity/ε transition with lowest energy
CH3SH 235 180 n-σ* (C-S)
CH3NH2 210 800 n-σ* (C-N)
CH3Cl 173 200 n-σ* (C-Cl)
CH3I 258 380 n-σ* (C-I)
CH3OH 183 200 n-σ* (C-O)

saturated alkyl halides में,इस transitionके लिए आवश्यक energy atom का size बढने पर (या atom की electro-negativity घटने पर) घटती हैं।chlorine की आयोडीन की तुलना में अधिक electro-negativity के कारण chlorine atom पर स्थित n-electrons को उतेजित करना अपेक्षाकृत कठिन होता हैं।

iodine पर n-electron कम मजबूती से बंधे रहते हैं जिसके कारण मिथाइल आयोडाइड में यह संक्रमण सरलता से होता हैं और इसका molar विलोपन गुणांक  मिथाइल क्लोराइड की तुलना में अधिक होता हैं।इसी प्रकार amine, alcohol की तुलना में high wavelength पर absorptionदर्शाते हैंजिसके कारण इसका विलोपन गुणांक का मान अधिक होता हैं । n—>σ*transition संक्रमण हाइड्रोजन atom के द्वारा प्रभावित होता हैं।

example के रूप में alcohol विलायक के molecules के साथ hydrogen bond बनाते हैं।इस संगुणन में ऑक्सीजन के non-bonding भाग लेते हैं।फलस्वरूप alcohol में n—>σ*संक्रमण के लिए high energy की need होती हैं।

n —>π*transition:-

इस प्रकार के transition में सबसे low energy की need होती हैं।यदि molecule में ऐसा atom ‌‌हैं जिसके पास n-electron हैं तथा दुसरे atom के साथ unsaturated bond बनाता हैं तब इसे molecule में n—–>π* transition होता हैं।अत: यह transition high length wavelength वाली radiations (comparatively low energy वाले radiations) के absorption से होता है।कई chromophores जैसे >c=o,-N=N-,>C=S आदि n—->π* transition show करते हैं example के लिए ,acetone तथा isobutane क्रमश:225 nm and  665 nm पर absorbed होकर R-band produce करते हैं। 

 

Compound
λ(nm)
Intensity/ε transition with the lowest energy
CH3COCH3 187 950 π-π* (C=O)
CH3COCH3 273 14 n-π* (C=O)
CH3CSCH3 460 weak n-π* (C=S)
CH3N=NCH3 347 15 n-π* (N=N)

π —>π*transition:-

इस प्रकार के transition के लिए n—->π* और n—>σ* transition के लिए आवश्यक energy के बीच की energy की need होती हैं। unsaturated compounds alkenes ,alkynes आदि में π—–>π*transition high wavelength पर हो सकता हैं किन्तु इतनी high wavelength पर नहीं होता हैं कि वे visible region में absorption कर सकें।

अपितु pair bond conjugationमे