BSC I CHEMISTRY QUIZ

Visham Chakriya Yogik kise kahte Hai-विषम चक्रीय यौगिक किसे कहते हैं

Visham Chakriya Yogik kise kahte Hai-बेंजीन रिंग में सारे कार्बन एटम होते हैं|रिंग में यदि कार्बन के अतिरिक्त अन्य एटम जेसे N,S या O जुड़ते हे तो इसे विषम चक्रीय यौगिक कहते हैं|विषम चक्रीय यौगिक किसे कहते हैं|ईथीलीन ऑक्साइड,सुक्सिनिक एनहाइड्राइड,शर्करा में भी विषम परमाणु होते हैं|लेकिन ये अधिक स्टेबल नहीं होते हैं|इनकी रिंग सरलता से ब्रेक हो जाती हैं|और इनमे एरोमेटिक गुण भी नहीं पाया जाता हैं|ऐसे यौगिको को विषम चक्रीय नहीं माना जाता हैं|

Visham Chakriya Yogik kise kahte Hai-विषम चक्रीय यौगिक किसे कहते हैं

जिनमे स्टेबल विषम चक्रीय  रिंग होती है और एरोमेटिक गुण भी पाया जाता हैं|विषम चक्रीय यौगिक किसे कहते हैं|वे विषम चक्रीय यौगिक  होते हैं |ये फाइव और सिक्स सदस्यीय होते हैं|उदाहरण थायोफीन,पिरोल व् पिरीडीन |Visham Chakriya Yogik kise kahte Hai ये   बेंजीन के समान स्टेबल और  एरोमेटिक गुण पाया जाता हैं|हीमिन,नेचुरल डाइज,अल्केलोइड व् क्लोरोफिल में विषम रिंग पायी जाती हैं|

क्लासिफिकेशन-

दो प्रकार के विषम चक्रीय यौगिक होते हैं|Visham Chakriya Yogik kise kahte Hai

  • 5 या 6 सदस्यीय विषम रिंग -ये भी दो प्रकार के होते हैं|

(i) एक विषम परमाणु  वाली 5 सदस्यीय विषम चक्रीय रिंग

(ii)दो विषम परमाणु  वाली 5 सदस्यीय विषम चक्रीय रिंग

(iii)एक विषम परमाणु  वाली 6 सदस्यीय विषम चक्रीय रिंग

(iv)दो विषम परमाणु  वाली 6 सदस्यीय विषम चक्रीय रिंग

फ्यूरेन या फरफ्यूरेन(ऑक्सा साइक्लोपेन्ट -2,4 डाइईन C4H4O

इसे चीड की लकड़ी के टार से निष्कर्षित किया जा सकता हैं|इसका फ्यूरेन नाम फरफ्यू  के बेस्ड पर रखा गया हैं|(ग्रीक भाषा में फरफ्यू  का मतलब चोकर यानि (bran)  हैं)|Visham Chakriya Yogik kise kahte Hai

1.इसे आमतौर पर हाइड्रोजनीकरण द्वारा टेट्राहाइड्रोफुरान में परिवर्तित किया जाता है|जिसका उपयोग विलायक के रूप में किया जाता है| और नायलॉन-6,6 के लिए कच्चे माल, हेक्सामेथाइलिडेनमाइन के उत्पादन के लिए किया जाता है। विषम चक्रीय यौगिक किसे कहते हैं|सॉल्वैंट्स और रासायनिक कच्चे माल के रूप में उपयोग करने के लिए फरैन परिवार के कई अन्य सदस्यों का बड़े पैमाने पर उत्पादन किया जाता है।

पॉलियामाइड यौगिक

2.नायलॉन-6,6-नायलॉन 6 और नायलॉन 66 पॉलियामाइड यौगिक हैं। एक पॉलियामाइड एक बहुलक है जो लिंक (-CO-NH-) के बीच दोहराता है जो या तो सिंथेटिक या प्राकृतिक हैं। Visham Chakriya Yogik kise kahte Hai|नायलॉन 6 और नायलॉन 66 सिंथेटिक पॉलीमाइड हैं। नायलॉन 6 एक अर्ध-क्रिस्टलीय पॉलियामाइड है और एक संघनन बहुलक नहीं है।

नायलॉन 66 पॉलियामाइड का दूसरा रूप है। नायलॉन 6 और नायलॉन 66 के बीच मुख्य अंतर यह है कि नायलॉन 6 का निर्माण रिंग ओपनिंग पोलीमराइजेशन के माध्यम से होता है| जबकि नायलॉन 66 कंडेनसेशन पोलीमराइजेशन के माध्यम से बनता है।

3.नायलॉन 6, के रूप में भी जाना जाता है polycaprolactam, रिंग पॉलिमराइजेशन के माध्यम से गठित एक पॉलियामाइड है। यह एक अर्ध-क्रिस्टलीय पॉलियामाइड है। विषम चक्रीय यौगिक किसे कहते हैं|इसे विभिन्न देशों में अलग-अलग नामों से बेचा जाता है। Ex: Perlon (जर्मनी)। नायलॉन 6 का रासायनिक सूत्र (C) के रूप में दिया जा सकता है6एच11नहीं)n.

रिंग ओपनिंग पोलीमराइजेशन

4.संश्लेषण प्रक्रिया में अंतर के कारण नायलॉन 6 अन्य प्रकार के नायलॉन से अलग है। नायलॉन 6 का उत्पादन केवल एक प्रकार के मोनोमर से होता है जिसे कैप्रोलैक्टम कहा जाता है। विषम चक्रीय यौगिक किसे कहते हैं|इसे कैप्रोलैक्टम के रिंग ओपनिंग पोलीमराइजेशन के माध्यम से संश्लेषित किया जाता है।

5.टेट्राहाइड्रोफुरान के औद्योगिक बाजार में कई उपयोग हैं।Visham Chakriya Yogik kise kahte Hai| यह प्राकृतिक और सिंथेटिक रेजिन के लिए एक बहुमुखी औद्योगिक विलायक है और नायलॉन के उत्पादन में इस्तेमाल किया जाने वाला विलायक है। यह पीवीसी के लिए एक औद्योगिक विलायक भी है।

6.टेट्राहाइड्रोफुरान भी एक मूल्यवान रासायनिक मध्यवर्ती है| क्योंकि यह पॉलीमर (टेट्रामेथिलीन ईथर) ग्लाइकोल जैसे पॉलिमर का अग्रदूत है। इस बहुलक का प्राथमिक उपयोग स्पैन्डेक्स जैसे इलास्टोमेरिक पॉलीयूरेथेन फाइबर का उत्पादन है। विषम चक्रीय यौगिक किसे कहते हैं|यह प्राकृतिक गैस उद्योग में एक मध्यवर्ती भी है जहां यह एक प्राकृतिक गैस गंधक है।

पॉलीयुरेथेन फाइबर

7.स्पैन्डेक्स जैसे इलास्टोमेरिक पॉलीयूरेथेन फाइबर-पॉलीयुरेथेन फाइबर, जिसे कभी-कभी स्पैन्डेक्स या इलास्टेन कहा जाता है|सिंथेटिक फाइबर होते हैं| जिसमें फाइबर बनाने वाला पदार्थ एक बहुलक होता है| जिसमें कम से कम 85 प्रतिशत सेगमेंटेड पॉलीयुरेथेन होता है। फाइबर का उत्पादन एक डायसोसाइनेट के साथ पॉलिएस्टर को प्रतिक्रिया करके किया जाता है।Visham Chakriya Yogik kise kahte Hai|

8.स्पैन्डेक्स में इलास्टोमेरिक, रबर जैसे गुण हैं और यह बहुत टिकाऊ है। वास्तव में, यह रबड़ से भी अधिक टिकाऊ है और बिना तोड़े इसे 500 प्रतिशत से अधिक बढ़ाया जा सकता है।Visham Chakriya Yogik kise kahte Hai| इसमें कई पतला एसिड और क्षार के लिए अच्छा रासायनिक प्रतिरोध है, लेकिन कुछ फाइबर को नुकसान पहुंचा सकते हैं।

सिंथेटिक फाइबर

9.अधिकांश अन्य सिंथेटिक फाइबर की तुलना में इसकी ताकत कम है|और इसकी गर्मी प्रतिरोध रचना के आधार पर काफी भिन्न हो सकती है। फाइबर में फफूंदी के लिए उत्कृष्ट प्रतिरोध होता है और पानी के संपर्क में आने पर सिकुड़ता नहीं है।

10.इसका उपयोग एक प्रतिक्रिया माध्यम के रूप में भी किया जाता है, मुख्य रूप से फार्मास्युटिकल उद्योग में, ग्रिग्नार्ड सिंथेस या लिथियम एल्यूमीनियम हाइड्राइड कटौती जैसी प्रक्रियाओं में।

टेट्राहाइड्रोफुरान(tetramethylene oxide)THF

खतरनाक सामान 3 पैकिंग समूहों (जिसे संयुक्त राष्ट्र पैकिंग समूह के रूप में भी जाना जाता है) में उन्हें खतरे की डिग्री के अनुसार सौंपा गया है: पैकिंग समूह I: उच्च खतरे। पैकिंग समूह II: मध्यम खतरा। पैकिंग समूह III: कम खतरा

हेक्सामेथाइलिडेनमाइन

नायलॉन-6,6

11.टेट्राहाइड्रोफुरान को पारंपरिक रूप से फुरफुरल प्रक्रिया का उपयोग करके उत्पादित किया गया था|जहां फरफुरल, मकई की भूसी से निकाला जाता है|उत्पादन में कच्चे माल के रूप में उपयोग किया जाता है। Visham Chakriya Yogik kise kahte Hai|हालांकि, इस पद्धति का नुकसान यह है कि कृषि की स्थितियों पर निर्भर आपूर्ति और, इसलिए, पर भरोसा नहीं किया जा सकता है| इसलिए पूरी तरह से सिंथेटिक रेपे प्रक्रिया के लिए एक कदम बनाया गया था।

12.रेपे प्रक्रिया में, इथेन और फॉर्मलाडिहाइड का उपयोग कच्चे माल के रूप में किया जाता है|जो पहले चरण में 1,4 ब्यूटेनियोल का उत्पादन करता है। टेट्राहाइड्रोफ्यूरान को एक अम्लीय आयन एक्सचेंज राल के अस्तित्व के तहत निर्जलीकरण द्वारा प्राप्त किया जा सकता है। वर्तमान में यह दुनिया भर में कार्यरत निष्कर्षण का मुख्य तरीका है।

विश्व वार्षिक उत्पादन

13.एक अन्य विधि एक ब्यूटाडाई क्लोरीनीकरण प्रक्रिया है|लेकिन भविष्य में सबसे अधिक संभावना है कि यह विधि ड्यूपॉन्ट द्वारा विकसित की गई है। इसमें मेनिक एनहाइड्राइड बनाने के लिए ऑक्सीकरण एन-ब्यूटेन शामिल है |और इसके बाद उत्प्रेरक हाइड्रोजनीकरण होता है। यह एक अपेक्षाकृत सरल प्रक्रिया है और रासायनिक उत्पादकों की रुचि है।

14.टेट्राहाइड्रोफुरान का विश्व वार्षिक उत्पादन लगभग 200,000 टन(181436948 kg) है और यह भविष्यवाणी की जाती है| कि मांग और उत्पादन बढ़ेगा क्योंकि चीनी अर्थव्यवस्था का विस्तार जारी रहेगा।

बनाने की विधियाँ 

पाल -नॉर संश्लेषण 

फ्यूरेन,पिरोल,थायोफीन डेरीवेटिवस  के सिंथेसिस के लिए 1,4 डाइकार्बोनिल  यौगिक उपयोगी इनिशियल पदार्थ  हैं|

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

Kathor-mradu Aml-Ksharak Pearson Awdharana-कठोर-मृदु अम्ल क्षारक पियर्सन धारणा

Kathor-mradu Aml-Ksharak Pearson Awdharana-कठोर-मृदु अम्ल क्षारक पियर्सन धारणा

Kathor-mradu Aml-Ksharak Pearson Awdharana-कठोर-मृदु अम्ल क्षारक पियर्सन धारणा|बेर्जीलियस (1796)ने खोजा की नेचर में कुछ मेटल एलेमेंट्स सल्फाइड के फॉर्म में पाए जाते हैं|जबकि कुछ अन्य ऑक्साइड,सल्फेट या सिलिकेट,कार्बोनेट के फॉर्म में पाए जाते हैं|इन तथ्यों का स्पस्टीकरण करने के लिए पीयरसन ने एक सिधांत प्रस्तुत जिसे कठोर-मृदु अम्ल-क्षारक सिधांत कहते हैं|

Kathor-mradu Aml-Ksharak Pearson Awdharana-कठोर-मृदु अम्ल क्षारक पियर्सन धारणा

इस सिधांत को इस प्रकार समझते हैं|

हार्ड एसिड-सॉफ्ट बेसेस(A)+सॉफ्ट एसिड-हार्ड बेसेस(B)  ⇌  हार्ड एसिड-हार्ड बेसेस (C)+सॉफ्ट एसिड-सॉफ्ट-बेसेस

यहाँ (A),(B),(C) तथा (D) साल्ट या काम्प्लेक्स कंपाउंड हैं|स्पस्ट हैं कि हार्ड एसिड हार्ड बेसेस के प्रति और सॉफ्ट एसिड सॉफ्ट बेसेस के प्रति आकर्षित रहते हैं|कठोर-मृदु अम्ल क्षारक पियर्सन धारणा|

इस आधार पर कह सकते हैं कि सॉफ्ट एसिड-सॉफ्ट-बेसेस और हार्ड एसिड-हार्ड बेसेस  उत्पाद स्थाई होते हैं|जबकि सॉफ्ट एसिड-हार्ड बेसेस और हार्ड एसिड-सॉफ्ट बेसेस उत्पाद अस्थाई होते हैं|कठोर-मृदु अम्ल क्षारक पियर्सन धारणा|

Kathor-mradu Aml-Ksharak Upyog

कठोर-मृदु अम्ल क्षारक धारणा के कुछ मुख्य उपयोग –

1.काम्प्लेक्स कंपाउंड्स का स्थायित्व 

AB निम्न प्रकार बनता हैं|

Hard And Soft Acids and Bases Pearson’s Concept
Hard And Soft Acids and Bases Pearson’s Concept

संकुल A:B तभी स्थाई होगा जब A और  B दोनों ही या तो सॉफ्ट हो या हार्ड हो |दोनों में से कोई भी यदि सॉफ्ट तथा दूसरा हार्ड हुआ तो काम्प्लेक्स अस्थाई होगा |कठोर-मृदु अम्ल क्षारक पियर्सन धारणा|उदाहरण

(a.) समान लिगंड वाले संकुल यौगिको का स्थायित्व 

ऐसे काम्प्लेक्स यौगिक जिनमे सेंट्रल मेटल एटम  से जुड़े सारे लिगंड्स समान होते हैं| जैसे [AgF2]-,[AgI2]-,[CoF6]3-

(i) Ag+ सॉफ्ट एसिड हैं|I- सॉफ्ट बेसेस हैं |जबकि F- एक हार्ड-बेसेस हैं|कांसेप्ट के अनुसार सॉफ्ट एसिड-सॉफ्ट बेसेस से संयुक्त होकर स्थायी यौगिक बनाता हैं|लेकिन सॉफ्ट एसिड-हार्ड बेसेस के साथ संयुक्त होने की प्रवृत्ति नहीं रखता हैं|Kathor-mradu Aml-Ksharak Pearson Awdharanaउदाहरण 

 

[AgI2]- एक स्टेबल काम्प्लेक्स हैं जबकि [AgF2]-नहीं पाया जाता हैं|Kathor-mradu Aml-Ksharak Pearson Awdharana

(ii) Co3+  एक हार्ड एसिड हैं|अतः यह हार्ड बेसेस F- के साथ एक स्थायी काम्प्लेक्स बनाता हैं|यह I- सॉफ्ट बेसेस के साथ अस्थायी काम्प्लेक्स बनायेगा |

इस प्रकार से [CoF6]3- स्थायी हैं|एवं [CoI6]3- अस्थायी काम्प्लेक्स हैं|Kathor-mradu Aml-Ksharak Pearson Awdharana

(iii) Cd2+ एक सॉफ्ट एसिड हैं|NH3 एक हार्ड बेसेस हैं,जबकि CN- एक सॉफ्ट बेसेस हैं|अतः Cd3+ सेंट्रल मेटल आयन NH3  लिगंड के साथ अनस्टेबल एवं CN- लिगंड के साथ स्टेबल काम्प्लेक्स बनाता हैं|

Kathor-mradu Aml-Ksharak Pearson Awdharana-कठोर-मृदु अम्ल क्षारक पियर्सन धारणा
Kathor-mradu Aml-Ksharak Pearson Awdharana-कठोर-मृदु अम्ल क्षारक पियर्सन धारणा

(b) डिफरेंट लिगंड वाले काम्प्लेक्स यौगिक का स्थायित्व 

वे काम्प्लेक्स कंपाउंड होते जिनमे सेंट्रल मेटल एटम से जुड़े लिगंड एक से अधिक प्रकार के होते हैं|जैसे [Co(NH3)5I]2+,[Co(CN)5I]3- आदि |Kathor-mradu Aml-Ksharak Pearson Awdharana

(i) Co3+ एक हार्ड एसिड हैं|NH3 और F- हार्ड बेसेस हैं जबकि I- सॉफ्ट  बेसेस हैं |सिधांत के अनुसार [Co(NH3)5F]2+ काम्प्लेक्स स्थायी होगा जबकि [Co(NH3)5I]2+ काम्प्लेक्स अस्थायी होगा |

(ii) इसी  प्रकार [Co(CN)5I]3-  काम्प्लेक्स [Co(CN)5F]3- काम्प्लेक्स की तुलना में अधिक स्टेबल हैं|इसका कारण CN- तथा I- लिगंड्स की नेचर समान हैं|ये दोनों ही सॉफ्ट बेसेस हैं|F- लिगंड तथा CN- लिगंड भिन्न नेचर रखते हैं|यहाँ F- हार्ड तथा सॉफ्ट बेसेस हैं|अतः काम्प्लेक्स [Co(CN)5F]3- अस्थायी हैं|Kathor-mradu Aml-Ksharak Pearson Awdharana

(2.)द्विअपघटन रिएक्शन  

हार्ड बेसेस सॉफ्ट एसिड से निर्मित साल्ट तथा हार्ड एसिड सॉफ्ट बेसेस से निर्मित साल्ट आपस में क्रिया करके सॉफ्ट एसिड तथा सॉफ्ट  एसिड और हार्ड एसिड हार्ड बेसेस साल्ट बनाते हैं|अतःरिएक्शन तभी होगी जब उत्पाद सॉफ्ट एसिड सॉफ्ट बेसेस या हार्ड एसिड हार्ड बेसेस साल्ट होते हैं|

(3.)उभय द्विदंती लिगंड्स(ambidentate ligands) युक्त काम्प्लेक्स आयन में बंध प्रकृति की व्याखा 

इस सिधांत के द्वारा यह स्पस्ट किया जा सकता हैं कि एम्बीडेंटेट लिगंड में कोनसा डोनर एटम सेंट्रल मेटल एटम से कंबाइंड होगा|इसके अनुसार एम्बीडेंटेट लिगंड का सॉफ्ट बेसेस एटम सॉफ्ट एसिड मेटल आयन से तथा हार्ड बेसेस एटम हार्ड एसिड मेटल एटम से कंबाइंड  होने की प्रवत्ति रखेंगे|

(i) एक एम्बीडेंटेट लिगंड SCN- हैं|यह सेंट्रल  मेटल एटम से S एटम या N एटम द्वारा जुड़ सकता हैं|Pd2+ एक सॉफ्ट एसिड हैं| SCN- जब Pd2+ से कंबाइंड  होता हैं तो SCN- का सॉफ्ट बेसेस एटम S बंध बनाने में भाग  हैं|

 

इसके अपोजिट Co2+ एक बॉर्डर लाइन एसिड हैं परन्तु Pd2+ के तुलना में अधिक हार्ड हैं |अतः SCN- जब Co2+ से कंबाइंड  होता हैं,तो SCN- का हार्ड बेसेस एटम N बंध  बनाने में भाग लेता हैं|

(4)कैटेलिस्ट के विषाक्त होने की व्याख्या 

Pt और  Pd कैटेलिस्ट का कार्य करते हैं|ये दोनों सॉफ्ट एसिड हैं|इस सिधांत के अनुसार सॉफ्ट एसिड सॉफ्ट बेसेस के साथ कंबाइंड होते हैं|ये कैटेलिस्ट CO,एल्कीन,फास्फोरस या आर्सेनिक लिगंड्स द्वारा विषाक्त हो जाते हैं|ये सभी लिगंड्स  सॉफ्ट बेसेस होते हैं|मेटल्स के ऊपर आसानी से अधिशोषित होकर ये लिगंड्स एक्टिव पॉइंट को समाप्त कर देते हैं|इसके विपरीत ये सॉफ्ट एसिड  कैटेलिस्ट F,o तथा N जैसे हार्ड बेसेस से विषाक्त नहीं  होते हैं|

(5) पदार्थो की विलेयता की व्याख्या

विलायक में किसी पदार्थ का घुलना तभी घुलता हैं जब पदार्थ का सॉफ्ट पार्ट विलायक के सॉफ्ट पार्ट से कंबाइंड होता हैं या हार्ड पार्ट हार्ड पार्ट से कंबाइंड होता हैं|Ag+ एक सॉफ्ट एसिड हैं|इसका जलीय सलूशन [Ag(H2O)n]+सॉफ्ट एसिड Ag+ तथा हार्ड बेसेस O(H2O) के मध्य बंध द्वारा बना हैं|इसी प्रकार I- एक सॉफ्ट बेसेस इसका जलीय सलूशन[I(H2O)]- सॉफ्ट बेसेस तथा हार्ड एसिड H+(H2O)के मध्य बंध द्वारा बना हैं|

[Ag(H2O)n]+        +     [I(H2O)m]       ———–>AgI  + (n+m)  H2O

इस प्रकार AgI जल में अविलय होता हैं|

अतः F- हेलाईड सर्वाधिक हार्ड बेसेस  होगा|[F(H2O)m]-में हार्ड बेसेस F- हार्ड एसिड H+(H2O) से जुड़े हैं|यह स्टेबल संयोजन हैं|इसी प्रकार AgF में Ag+ सॉफ्ट एसिड तथा F- हार्ड बेसेस होने के कारण यह अन स्टेबल  योगिक  होगा|

[Ag(H2o)n]+  +[F(H2O)m]-  <———– AgF +(n+m) H2O

यही कारण हैं कि AgF जल में विलय हैं|

(6) प्रकृति में मेटल्स के पाए जाने की व्याखा 

इस धारणा द्वारा मेटल्स के नेचर में भिभिन्न अयस्को(ores) के रूप में पाए जाने की व्याख्या इस प्रकार से की जा सकती हैं|

(i) मैग्नेशियम और कैल्सियम कार्बोनेट के रूप में पाए जाते हैं|Mg+ तथा Ca+ हार्ड एसिड हैं|CO32- हार्ड बेसेस हैं|अतः MgCo3 और CaCo3 स्टेबल यौगिक  होगे|

(ii) Al3+ एक हार्ड एसिड  हैं|O2- भी एक हार्ड बेसेस  हैं|अतः प्रकृति में अलुनियम Al2O3 खनिज के रूप में पाया जाता हैं|

iii) Cu+,Ag+,तथा Hg+ सभी सॉफ्ट एसिड हैं|S2- भी सॉफ्ट बेसेस  हैं| अतःकॉपर,सिल्वर तथा मरकरी  प्रकृति में Cu2S,Ag2S तथा HgS खनिजों के रूप में पाए जाते हैं|

(7) बेसिक रेडिकल के गुणात्मक विश्लेषण में समूह अभिकर्मकों के चयन की व्याख्या

बेसिक रेडिकल के लिए प्रत्येक समूह का अबक्षेपन एक विशेष समूह अभिकर्मक द्वारा किया जाता हैं|प्रथम समूह में Ag+,Hg2++तथा Pb2+ मूलक हैं|Ag+,Hg2++ दोनों सॉफ्ट एसिड हैं जबकि Pb2+ सीमा रेखा अम्ल हैं|ये सभी सीमा रेखा क्षारक Cl- के साथ स्टेबल क्लोराइड बनाते  हैं |इस प्रकार प्रथम समूह में AgCl,Hg2Cl2 तथा PbCl2 काअबक्षेप प्राप्त होता हैं|द्वितीय समूह में मुलको को सल्फाइड के रूप में अबक्षेपित किया जाता हैं|S2- एक सॉफ्ट बेसेस हैं |अतः यह सॉफ्ट या बॉर्डर लाइन एसिड से कंबाइंड होकर स्टेबल कंपाउंड देते हैं|इसी प्रकार अन्य समूहों का स्पस्टीकरण किया जा सकता हैं |

दोस्तों इस प्रकार से बहुत से example है ,जिसे में अपडेट करता रहूँगा.कृपया इसे शेयर कीजिये  फ्रेंड एंड फॅमिली में और आपकी कोई इस रिलेटेड प्रॉब्लम हो तो आप contact उस में जाकर फॉर्म सबमिट कर सकते है.अगर आपको लैपटॉप से सम्बंधित कोई जानकर चाहिए तो आप इस लिंक पर जाकर देख सकते है.थैंक्स!आपका दिन शुभ हो!